
सिद्धांत प्रज्ञा को अपनी बाहों में उठाकर बेड पर ले आया और फिर उसने उसके पैर के पंजों को बड़े ही प्यार से अपने हथेली में भरते हुए सिर झुका कर कहा, "मुझे माफ कर दो सोना, मुझे वाकई अपनी गलती का एहसास हो रहा है। मुझे पता है कि ये हम दोनों की लाइफ का सबसे बड़ा मोमेंट था, जो शायद मेरी वजह से स्पॉइल हो गया। अगर मेरी इस गलती की कोई माफी नहीं है, तो मैं हर सजा पाने के लिए तैयार हूं। तुम चाहो, तो इसके बदले मेरी जान....।"
अभी वो आगे कुछ कहता, उससे पहले ही प्रज्ञा ने अपने पैरों को समेटा और तुरंत उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर आंसु को साफ करते हुए बोली, "प्लीज सिद्धांत, ऐसी बातें मत करो। इतनी मुश्किलों के बाद तो हम दोनों एक हुए हैं और तुम ऐसे जान लेने और देने की बात करके और तकलीफ मत दो। मुझे नहीं देनी तुम्हें कोई सजा और ना ही अब मुझे तुमसे नाराज रहना है।" ये बोलकर वो पूरा इस गोद में चढ़ गई और उसके सीने से लग गई सिद्धांत ने भी उसे बेहद प्यार से अपनी बाहों में भर लिया है।










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