
ईशानी को हर हाल में बस अपने बच्चे चाहिए थे । आखिर उसके जीने की वजह उसके बच्चे ही थे ।और उनसे एक पल भी दूर रहना ईशानी के लिए मुश्किल होता था।
उसे इस तरह रोता देख मिली ने उसे शांत करते हुए कहा, "ईशानी तुम इस तरह रो मत । चलो मैं तुम्हारे साथ चलती हूं। हम चलकर वो फ्लोर भी चेक कर लेते हैं। आई होप के बच्चे वहां मिल ही जाएं,, ये कहते हुए और वो दोनों लिफ्ट से ऊपर की ओर चले गए।











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