
शाम ढलते-ढलते कबीर ने मुस्कुराते हुए आर्या की तरफ देखा। उसके हाथों में भी कुछ शॉपिंग बैग थे।
"अब मुझे निकलना चाहिए। घर पर भी सब इंतज़ार कर रहे होंगे।"


शाम ढलते-ढलते कबीर ने मुस्कुराते हुए आर्या की तरफ देखा। उसके हाथों में भी कुछ शॉपिंग बैग थे।
"अब मुझे निकलना चाहिए। घर पर भी सब इंतज़ार कर रहे होंगे।"

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