
गोदाम की हवा में धूल तैर रही थी। ऊपर लटकता एक अकेला बल्ब बार-बार झिलमिला रहा था, जिससे कमरे में मौजूद हर चेहरे पर बदलती हुई परछाइयाँ पड़ रही थीं।
अनन्या की उँगलियाँ ट्रिगर पर कसी हुई थीं।


गोदाम की हवा में धूल तैर रही थी। ऊपर लटकता एक अकेला बल्ब बार-बार झिलमिला रहा था, जिससे कमरे में मौजूद हर चेहरे पर बदलती हुई परछाइयाँ पड़ रही थीं।
अनन्या की उँगलियाँ ट्रिगर पर कसी हुई थीं।

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