
रायचंद हवेली आज पहली बार इति को खाली-खाली लग रही थी।
पूरा आँगन अब भी फूलों की खुशबू से भरा था… शहनाई की हल्की आवाज़ हवा में तैर रही थी… लेकिन फिर भी माहौल भावुक हो चुका था।


रायचंद हवेली आज पहली बार इति को खाली-खाली लग रही थी।
पूरा आँगन अब भी फूलों की खुशबू से भरा था… शहनाई की हल्की आवाज़ हवा में तैर रही थी… लेकिन फिर भी माहौल भावुक हो चुका था।

Write a comment ...
Write a comment ...