
स्वस्ति तेजी से हॉल से निकलकर अंदर वाले लंबे कॉरिडोर की तरफ बढ़ रही थी। उसकी आंखों में भरे आंसू अब पलकों की कैद से बाहर आने को बेताब थे। उसने जल्दी-जल्दी दुपट्टे से अपना चेहरा पोंछा, लेकिन गालों पर लगी हल्दी के साथ आंसुओं की नमी साफ दिखाई दे रही थी।
उसे बस किसी तरह अपने कमरे तक पहुंचना था।










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