
पल्लवी जी के गुस्सा इति और देवांग के साथ साथ दुर्गा जी भी हैरान रह गईं। वहीं पल्लवी जी ने अब देवांग की ओर देखकर तेज आवाज में कहा, "जल्द से जल्द मुझे मुग्धा का पता चाहिए जो और जाकर उसे ढूंढ कर लो और जब तक मेरी बच्ची को ढूंढ नहीं लोगे तुम घर मत आना समझे।"
इस पर देवांग ने जल्दी से हां में सिर हिलाया, और वहां से जाने को हुआ वैसे ही डोर बेल बजी। देवांग जो की दरवाजे के नजदीक था उसने आगे बढ़कर दरवाजा खोला तो देखा सामने मुग्धा खड़ी थी जिसे देखकर देवांग पहले हैरान हुआ और फिर उस ने तुरंत आगे बढ़ाकर उसे गले लगाते हुए परेशानी से कहा, "लिटिल रैबिट कहां चली गई थी तुम तुम्हें पता भी है हम लोग कितना परेशान हो गए थे। तुम ठीक तो हो ना ?"










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