
करीब रात के ग्यारह बज चुके थे।
होटल का ग्रैंड बॉलरूम अब धीरे-धीरे खाली होने लगा था। मेहमान एक-एक करके विदा ले रहे थे। कोई आखिरी बार हाथ मिला रहा था, कोई अगली बिजनेस मीटिंग की बात कर रहा था। इवा और प्रखंड भी औपचारिक विदाई देकर बाहर निकल आए।


करीब रात के ग्यारह बज चुके थे।
होटल का ग्रैंड बॉलरूम अब धीरे-धीरे खाली होने लगा था। मेहमान एक-एक करके विदा ले रहे थे। कोई आखिरी बार हाथ मिला रहा था, कोई अगली बिजनेस मीटिंग की बात कर रहा था। इवा और प्रखंड भी औपचारिक विदाई देकर बाहर निकल आए।

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