मुग्धा इस वक्त वॉशरूम में खड़ी मिरर खुद को देखकर आसूं बहाए जा रही थी और फिर उसने डर से अटकती हुई आवाज में अपने शरीर पर कांपते हाथ फिराते hur खुद से कहा___ "आ... आखिर ये मेरे साथ क्या हुआ है... ?? ये मेरी बॉडी पर इतने... इतने लाल लाल रेसेस कैसे हो गए ? कल तक तो मैं ठीक थी फिर ये निशान... कहीं कहीं मुझे कोई बीमारी तो नहीं हो गई ??" ये कहते हुए मुग्धा डर के मारे खुद को अपनी ही बाहों में समेट कर रोने लगी।
इस बात से अनजान की कोई उसकी इस हालत को देखकर इस वक्त डेवीलिश स्माइल के साथ मुस्कुरा रहा था और ये कोई और नहीं बल्कि वेदांग था।










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