अब तक शाम हो चुकी थी। वही तरक्ष को लगातार रीमा जी का फोन आ रहा था कि वो कब घर आएगा, क्योंकि शादी का मुहूर्त थोड़ी देर में होने वाला था। जिस वजह से इरिटेट होते हुए वो उन्हें आने का बोल देता है और ऑफिस से निकल जाता है। लेकिन अभी वो पार्किंग एरिया में पहुंचा ही था कि तभी उसका फोन बजा। तरक्ष पहले से ही इरिटेट था और उसने गुस्से से फोन पिक करते हुए कहा, "अब क्या हो गया? तुम सारी इनफार्मेशन एक बार में नहीं दे सकते हो?"
लेकिन तभी सामने से उसके खास आदमी ने घबराई हुई आवाज में कहा, "ठाकुर साहब, ठाकुर साहब, ठकुराइन को कुछ लोग उठाकर ले गए। आप जल्दी से जल्दी कुछ कीजिए।" उसकी बात सुनकर तरक्ष, जोकि कार का दरवाजा खोल रहा था, उसके हाथ रुक गए और चेहरा डार्क हो गया। अगली बार उसने गुस्से से चिल्लाते हुए कहा, "बेवकूफ इंसान, कोई तुम्हारी आंखों के सामने मेरी बीवी को उठाकर ले गया और तुम बस देखते रह गए। तुमने कुछ किया क्यों नहीं?"










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