
कमरे का दरवाज़ा बंद होते ही पूरे माहौल में वही भारी खामोशी फैल गई थी… जो हमेशा मलय के आने के बाद फैल जाया करती थी।
स्वस्ति धीरे-धीरे कदमों से कमरे के अंदर आई। उसके हाथों में कॉफी ट्रे थी जो हल्के से कांप रही थी। शायद हाथों से ज्यादा वो खुद कांप रही थी।









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