
एम्बुलेंस की आवाज़ मंदिर के बाहर गूंज रही थी। पूरा माहौल खून, चीखों और डर से भर चुका था। इवा अपने पापा को गोद में लिए लगातार रो रही थी। उसके हाथ खून से सन चुके थे। श्रीकांत की सांसें बहुत धीमी पड़ती जा रही थीं।
“पापा… प्लीज आंखें खोलिए…” उसकी आवाज टूट रही थी।










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