
रात के करीब 8 बज रहे थे, जब इवा खाना पीना खाकर सारा काम धाम निपटा कर सोने के लिए अपने कमरे में ऊपर जा रही थी। अभी वो सीढ़ियों तक कि ही पहुंची थी की तभी अचानक से डोर बेल बजी। जिसे सुनकर उसके कदम रुक गए। तभी डोर बेल एक बार फिर बजी...! पहले तो इवा ने सोचा कि वो दरवाजा नहीं खुलेगी लेकिन तभी डोर बेल तीसरी बार बजी जिसे सुनकर इवा को लगा कि शायद पड़ोसी होंगे तो एक बार उसे देख लेना चाहिए। और यही सोच कर उसने अपनी कदम दरवाजे की ओर बढ़ा दिए।।
दरवाजे पर पहुंचकर उसने जैसे ही गेट खोल अचानक से उसके चेहरे के भाव बदल गए क्योंकि सामने निरंजन खड़ा था जिसके चेहरे पर एक अजीब सी भद्दी स्माइल थी। उसे देखकर इवा ने दो कदम पीछे लेते हुए अटकती आवाज में कहा__ "आ... आप, आप इस वक्त यहां क्या कर रहे हैं आप तो अपने गांव चले गए थे ना। फिर ...!!"










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