
इसके जवाब में रनविजय धीरे से उसकी ओर मुड़ते हुए उसके चेहरे को अपने हाथों में भरकर गहरी आवाज में बोला, "मैं चाहे कहीं भी चला जाऊं, लेकिन आपसे दूर कभी नहीं जा पाऊंगा। मैं आपकी नजरों के सामने रहूं या ना रहूं, लेकिन मेरी नजरें हमेशा आपके ऊपर रहती हैं, बॉस, इसलिए आप फिकर मत करिए। मैं आपको चाहे दिखाई दूं या ना दूं, मैं हमेशा आपके आसपास ही रहूंगा।"
ये बोलकर उसने कशिश को अपनी बाहों में भर लिया। वही कशिश उसकी घुमावदार बातों को ज्यादा समझ नहीं पाई, लेकिन रणविजय के सीने से लगने के बाद वो वैसे भी सब कुछ भूल जाती है और एक सुकून से अपने आप उसकी आंखें बंद हो जाती हैं।











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