
तीन दिन बाद,
इन तीन दिनों में कशिश सिर्फ और सिर्फ बेड से बाथरूम और बाथरूम से बेड तक ही आती जाती रही बाकी ना तो उसने कुछ खाया पिया और ना ही कमरे के बाहर उसने कदम रखा यहां तक कि उसने रणविजय से कोई बात नहीं की वही रणविजय भी उसके चक्कर में ना तो कुछ खाता-पीता ना ही कुछ और काम करता हर वक्त वो कशिश को ही संभालने में लगा हुआ था।










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