
थोड़ी देर बाद प्रज्ञा फ्रेश होकर वापस से हाल में आई तब तक वहां पर सिद्धांत और तारा आ चुकी थी प्रज्ञा ने जैसे ही सिद्धांत को देखा उसके चेहरे पर एक अलग ही तरह की बड़ी सी मुस्कुराहट आ गई और वह सीधे सिद्धांत को हग करते हुए बोली, "What a pleasant surprise Sid, कितने सालों बाद मैं तुम्हें देख रही हूं तुमने तो मुझे भूला ही दिया होगा। है ना ?"
सिद्धांत जो प्रज्ञा के इस तरह से हग करने से थोड़ा शौक हो गया था उसने धीरे से प्रज्ञा को खुद से दूर करते हुए हल्की सी स्माइल के साथ कहा, "अरे नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है। वो तो आज कल बिजनेस का वर्क लोड ज्यादा है इस वजह से ज्यादा किसी से मिलना जुलना नहीं हो पाता। ख़ैर.. तुम बताओ तुम्हारा यहां कैसे आना हुआ ?"










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