
स्वस्ति ने सर झुकाते हुए कहा___ "आप को रोक सकने की ना तो मेरे अंदर ताकत है और ना ही मुझे कोई हक। और रही बात आपके आने की, तो मुझे नहीं समझ आया की मैं क्या कहूं ? आप बता दीजिए मुझे कब कैसे रिएक्ट करना है मैं अगली बार से वैसा ही करूंगी।"
स्वस्ति की ये बात सुनकर मलय ने उसे घूर कर देखा और फिर उसके चेहरे को अपने हाथों से दबाते हुए सख्त आवाज में बोला___ "मेरे सामने तुम्हें ज्यादा मासूम बनने की जरूरत नहीं है... समझी। मैं अच्छे से जानता हूं की तुम ये सब नाटक सिर्फ इसलिए कर रही हो कि मैं तुम पर यकीन कर लूं, समझूं की तुम बहुत बेचारी हो। but, अगर तुम्हारे छोटे दिमाग में ऐसा कुछ चल रहा है तो एक बात याद रखना तुम चाहे कितना भी मासूम बनने की कोशिश कर लो अब मैं तुम पर यकीन नहीं करने वाला।










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