
कशिश ने गुस्से से शाश्वत पर चिल्लाते हुए कहा, "आखिर तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है मैं चाहे जहां रहूं, तुम होते कौन हो मुझ पर सवाल उठाने वाले। आज तक मैंने अपने बाप का कहा नहीं माना तो तुम कौन हो जिसकी मैं बात मानू। ये मेरी ज़िंदगी है मैं चाहे जिस के साथ रहूं, जो मन में आए करूं तुम्हें क्या .......,, क्यूं हर वक्त तुम उसके पिछे पड़े रहते हो ?"
तो शाश्वत ने उसके कंधे को मजबूती से पकड़ते हुए दांत पीसकर कहा___ "क्यूंकि मुझे जलन होती है तुम्हें उस इंसान के साथ देखकर। वो आदमी मुझे सकल से ही शातिर लगता है, मुझे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होता जब मैं तुम्हें उस नौकर के साथ तुम्हारे विला में अकेले देखता हूं। उस वक्त मेरा मन करता है कि मैं उसकी जान ले लूं।" कहते हुए शास्वत गुस्से से लाल हो गया था।











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